तिब्बत के लगातार भूकंप से हिमालयी क्षेत्र में चिंता

तिब्बत में दो दिन के भीतर आए भूकंप के झटकों ने हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को सात तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद शनिवार को फिर तीन झटके दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है।
हिमालय की पहाड़ियां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव से बनी हैं। यह टकराव आज भी जारी है, जिससे यहां लगातार ऊर्जा जमा होती रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ऊर्जा का निकलना समय-समय पर भूकंप के रूप में सामने आता है।
चिंता की बात यह है कि हिमालयी क्षेत्र में आबादी घनत्व बढ़ रहा है और निर्माण कार्य भी तेजी से हो रहा है। भूकंपरोधी तकनीक के बिना बनी इमारतें बड़े झटकों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। 2015 के नेपाल भूकंप ने यह सबक पहले ही सिखाया है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस क्षेत्र में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जाए और लोगों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए। सरकारों को निर्माण नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा। प्रकृति की चेतावनी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
तस्वीर: Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
