करजत में बत्तीस हजार पेड़ों की कटाई के खिलाफ उठा विरोध

महाराष्ट्र के करजत में लगभग 32 हजार पेड़ों को काटने की योजना के खिलाफ स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने आवाज उठाई है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को इस मुद्दे पर विरोध तेज हो गया, जिसमें पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी, वर्षा चक्र और वन्यजीवों के आवास पर गंभीर असर पड़ेगा।
विरोध करने वालों का तर्क है कि विकास के नाम पर हरियाली को बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। उनका कहना है कि पेड़ न केवल ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, भूजल को सहेजते हैं और गर्मी को कम करते हैं। एक बार कट जाने के बाद दशकों पुराने पेड़ों की भरपाई नए पौधों से तुरंत नहीं हो सकती, इसलिए किसी भी परियोजना से पहले पर्यावरणीय असर का गंभीर मूल्यांकन जरूरी है।
दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े पक्ष विकास और बुनियादी ढाँचे की जरूरतों का हवाला देते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना ही स्थायी रास्ता है। इसके लिए वैकल्पिक मार्ग, पेड़ों को स्थानांतरित करने की योजना और बड़े पैमाने पर पुनर्वनीकरण जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं। इस मामले में प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजर बनी हुई है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Tree_Harvesting_in_Leapmoor_Forest_-_geograph.org.uk_-_132839.jpg (CC BY-SA 2.0)
