विशेष रिपोर्ट: स्नातक-शिक्षक एमएलसी चुनाव लोकतंत्र की अनूठी परंपरा

उत्तर प्रदेश और बिहार में आज हो रहे विधान परिषद चुनावों की सबसे खास बात है स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र। दुनिया के गिने-चुने लोकतंत्रों में भारत ही ऐसा देश है, जहां स्नातकों और शिक्षकों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र होते हैं और वे अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र की अनूठी विशेषता है।
देश के सिर्फ कुछ राज्यों में ही विधान परिषद है, जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इन परिषदों में कुछ सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से और कुछ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। इसके पीछे सोच यह थी कि शिक्षित वर्ग और शिक्षक समुदाय की आवाज़ विधायिका में सीधे पहुंचे।
आलोचक इसे अप्रासंगिक बताते हैं, तो समर्थक इसे ज्ञान-आधारित प्रतिनिधित्व का माध्यम मानते हैं। जो भी हो, इन चुनावों में प्रचार का अंदाज़ आम चुनावों से बिल्कुल अलग होता है और मतदाता सूची भी सीमित होती है। आज का मतदान इसी परंपरा की जीवंतता का प्रमाण है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File%3ABallot_Drop_Box_Boston.jpg (CC BY-SA 4.0)
