चांद पर नई रेस: अमेरिका की देरी, चीन की तेज़ रफ़्तार

चांद पर दोबारा इंसान भेजने की दौड़ एक नया मोड़ ले रही है। नासा का आर्टेमिस-द्वितीय मिशन पचास साल से अधिक समय बाद इंसानों को चांद की उड़ान पर ले गया — यह अपने आप में एक बड़ा मील का पत्थर था। लेकिन चांद की सतह पर उतरने की योजना एक बार फिर खिसक गई है, जिससे अमेरिकी कार्यक्रम की रफ़्तार पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर चीन तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उसने फरवरी 2026 में लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट और मेंगझोउ यान का आपातकालीन परीक्षण पूरा किया, और अगस्त में अपने चांद लैंडर का लैंडिंग-टेकऑफ़ परीक्षण भी सफल रहा। चीन का लक्ष्य 2030 तक चांद पर मानव उतारने का है। इस दौड़ में भारत भी पीछे नहीं है — गगनयान की पहली बिना-चालक उड़ान 2026 की आखिरी तिमाही में लक्षित है, 2027 में चालक दल वाली उड़ान, 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चांद पर भारतीय उतारने का संकल्प है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद पानी और खनिज संसाधनों की भू-राजनीति इस रेस को और तीखा बना रही है, जिसमें आर्टेमिस समझौते के 70 से अधिक हस्ताक्षरकर्ता देश शामिल हैं।
तस्वीर: Wikimedia Commons (Public domain)
