एक साल में सरिया छब्बीस प्रतिशत महंगा, निर्माण लागत बढ़ी

घर बनाने वालों की जेब पर इस्पात की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ रहा है। इस्पात मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर दो हजार छब्बीस में चार महानगरों में दस मिलीमीटर टीएमटी सरिया औसतन छियासठ हजार छह सौ पैंतालीस रुपये प्रति टन बिका, जो एक साल पहले की तुलना में छब्बीस प्रतिशत महंगा है। हॉट रोल्ड कॉइल, कोल्ड रोल्ड कॉइल और जस्ती चादर की कीमतों में भी तीस प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। अप्रैल से सितंबर के बीच देश में तैयार इस्पात की खपत आठ करोड़ पचास लाख टन रही, जो पिछले साल से सात दशमलव छह प्रतिशत अधिक है। वहीं कच्चे इस्पात का उत्पादन केवल दो दशमलव नौ प्रतिशत बढ़ा। मांग और उत्पादन के बीच यह अंतर आयात से पूरा हो रहा है। छह महीनों में भारत ने इकतालीस लाख टन से अधिक तैयार इस्पात मंगाया, जबकि निर्यात पैंतीस लाख टन रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण गतिविधियों की रफ्तार तेज है, इसलिए उत्पादन क्षमता बढ़ाना अब जरूरी हो गया है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:US_Navy_040914-N-2970T-029_Builder_3rd_Class_Mark_Dyas,_assigned_to_Naval_Mobile_Construction_Battalion_One_Three_Three_(NMCB-133),_Detail_Sasebo,_slices_through_a_steel_reinforcement_bar.jpg (Public domain)
