तिमाही नतीजे और फेड फैसला तय करेंगे बाजार की दिशा

आने वाले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कंपनियों के तिमाही नतीजों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले से तय होगी। बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें चिंता का प्रमुख विषय बनी हुई हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेजी भारत के ऊर्जा आयात बिल को बढ़ा सकती है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने, रुपये पर दबाव पड़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।
पिछले कम कारोबारी सत्रों वाले सप्ताह में घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूट गया था, जबकि एनएसई का निफ्टी 546.15 अंक यानी 2.36 प्रतिशत नीचे आया था। जानकारों के अनुसार घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं वैश्विक दबाव का कितना मुकाबला कर पाती हैं।
इस बीच निवेशकों की नजर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर पर भी रहेगी। जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का प्राथमिक बाजार की धारणा पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय नतीजों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Frankfurt%20Stock%20Exchange%20%28Ank%20Kumar%29%2001.jpg (CC BY-SA 4.0)
