स्कूलों में कौशल शिक्षा पर बढ़ा ज़ोर

नई दिल्ली। स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ कौशल शिक्षा पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक हुनर सिखाने की दिशा में कई राज्य आगे बढ़ रहे हैं। कहीं छात्र कंप्यूटर और कोडिंग सीख रहे हैं तो कहीं बागवानी, बढ़ईगीरी, सिलाई और स्थानीय हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कौशल शिक्षा से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है और भविष्य में रोज़गार के अवसरों के लिए वे बेहतर तैयार होते हैं। स्कूलों में कौशल प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं और स्थानीय कारीगरों व उद्योगों को भी प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है, ताकि छात्रों को असली कार्य अनुभव मिल सके। शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, क्योंकि कौशल विषय पढ़ाने का तरीका पारंपरिक विषयों से अलग होता है। अभिभावकों में भी इस बदलाव को लेकर रुचि बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज़ के स्कूलों तक संसाधन पहुंचाना अभी चुनौती है। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में हर स्कूल में कम से कम एक कौशल विषय अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा हुनर सीखने से वंचित न रहे।
