तेल 116 डॉलर पार, ईरान तनाव से महँगाई का खतरा

दुनिया के तेल बाज़ार में एक बार फिर तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड का भाव एक सौ सोलह डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है, जो पिछले पाँच महीनों का सबसे ऊँचा स्तर है। जानकारों का कहना है कि इस तेज़ी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, सऊदी अरब पर हमलों की खबरें और जहाज़रानी मार्गों पर मंडराता खतरा है। जब तेल महँगा होता है तो इसका असर सीधे पेट्रोल-डीज़ल, माल ढुलाई और रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों पर पड़ता है। अमेरिका में भी इस बात की चर्चा है कि ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई की संभावना से बाज़ार में घबराहट बढ़ी है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात पर निर्भर देशों का खर्च बढ़ता है और महँगाई का दबाव गहराता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह चिंता की बात है, क्योंकि कच्चे तेल के आयात बिल में बढ़ोतरी से रुपये और राजकोषीय घाटे पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा बढ़ जाएगा।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Pumpjacks%20are%20operating%20in%20Nizhnekamsk.jpg (CC BY-SA 4.0)
