बाल मज़दूर बचाव NGO के खिलाफ केस रद्द, SC का फैसला

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक ईंट भट्ठे से बंधुआ मजदूरों और नाबालिग बच्चों को छुड़ाने के लिए हुई छापेमारी के दौरान कथित अत्यधिक जोश के आरोप में NGO ‘गुड़िया’ के कार्यकर्ताओं के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह कार्रवाई कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
‘गुड़िया’ उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी और लड़कियों व बच्चों के व्यावसायिक यौन शोषण के खिलाफ काम करने वाली प्रतिष्ठित संस्था है, जिसके प्रयासों से कई नाबालिग लड़कियों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया है। अदालत ने कहा कि आरोपपत्र और गवाहों के बयानों से ऐसा नहीं लगता कि श्रमिकों को ले जाते समय कोई बल प्रयोग किया गया या सरकारी काम में बाधा डालने का इरादा था।
बेंच ने कहा कि कार्यकर्ताओं और श्रम प्रवर्तन अधिकारियों के बीच विचारों का वास्तविक मतभेद था — कार्यकर्ता पूछताछ थाने जैसे तटस्थ स्थान पर चाहते थे, जबकि अधिकारी उसी जगह पूछताछ चाहते थे। सरकारी काम में बाधा के अपराध के लिए आवश्यक इरादा (मेनस रिया) यहां पूरी तरह गायब था।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Brick_Kiln_TMU_Moradabad_UP_Apr25_A7CR_05557.jpg (CC BY-SA 4.0)
