गोवर्धन पूजा और भाई दूज का महत्व, जानें परंपराएं

अयोध्या। दीपावली के बाद मनाए जाने वाले गोवर्धन पूजा और भाई दूज के पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दे रहा है। गोवर्धन पूजा में अन्नकूट का भोग लगाने और गोवर्धन पर्वत की कथा सुनने की परंपरा है, जो प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाती है। मान्यता है कि इस दिन घरों में गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके बाद भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं और भाई भी बहनों को उपहार देकर स्नेह जताते हैं। बाजारों में मिठाइयों, नारियल और पूजा सामग्री की खरीदारी बढ़ गई है। जानकारों के मुताबिक ये पर्व सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि परिवार को जोड़ने और रिश्तों में मिठास बनाए रखने का अवसर भी हैं। त्योहारों के इस क्रम में घरों में सफाई, सजावट और पारंपरिक व्यंजनों की तैयारियां जोरों पर हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे पर्व को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाएं और जरूरतमंदों के साथ भी खुशियां बांटें।
