प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा पर फिर उठी आवाज

नई दिल्ली। प्रवासी मजदूरों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर आवाज तेज हुई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले मजदूरों को अक्सर पंजीकरण, रहने की सुविधा और समय पर मजदूरी जैसी बुनियादी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। त्योहारी सीजन में घर लौटने वाले मजदूरों की संख्या बढ़ने के साथ ही स्टेशनों और बस अड्डों पर भीड़ भी बढ़ जाती है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मजदूरों के लिए हेल्प डेस्क, मुफ्त कानूनी सलाह और आपात स्थिति में मदद की व्यवस्था हर बड़े शहर में उपलब्ध हो। उनका यह भी कहना है कि किसी भी मजदूर के साथ भेदभाव या शोषण की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि हर मजदूर को सम्मान के साथ काम और जीवन जीने का अधिकार मिल सके।
