वोल्वो और अमेरिकन एक्सप्रेस में हज़ारों नौकरियाँ खत्म होंगी

दुनिया की बड़ी कंपनियों में छँटनी का दौर तेज़ हो गया है और इसका असर अब आम कर्मचारियों तक साफ नज़र आने लगा है। स्वीडन की कार कंपनी वोल्वो ने अपने वैश्विक कार्यबल में छह प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया है, जिसके तहत करीब ढाई हज़ार नौकरियाँ खत्म होंगी। कंपनी का कहना है कि इस कदम से करीब पचास करोड़ डॉलर की बचत होगी, लेकिन शेयर की कीमतों में भारी गिरावट और कड़ी प्रतिस्पर्धा ने उसे यह कठिन फैसला लेने पर मजबूर किया है। उधर अमेरिकन एक्सप्रेस ने भी करीब साढ़े तीन हज़ार कर्मचारियों की छँटनी की घोषणा की है, जो उसके कुल कार्यबल का लगभग पाँच प्रतिशत है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी का मुनाफा बढ़कर तीन अरब इकहत्तर करोड़ डॉलर तक पहुँच गया है, फिर भी वह दक्षता बढ़ाने के नाम पर कर्मचारियों की संख्या घटा रही है। जानकारों का कहना है कि मुनाफे के बावजूद छँटनी का चलन बताता है कि कंपनियाँ भविष्य की मंदी और लागत के दबाव से पहले ही सतर्क हो रही हैं। इससे नौकरीपेशा लोगों में असुरक्षा बढ़ रही है और वैश्विक रोज़गार बाज़ार पर दबाव साफ दिख रहा है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Volvo%20240%20Turbo%2C%20Anders%20Olofsson%2019850706-1.jpg (CC BY-SA 2.0 de)
