विशेष रिपोर्ट: मतदाता सूची सुधार की पूरी प्रक्रिया आसान शब्दों में

मतदाता सूची किसी भी चुनाव की नींव होती है। यदि सूची में नाम गलत दर्ज हों, मृत व्यक्तियों के नाम रह जाएं या नए युवा मतदाता जुड़ने से रह जाएं, तो चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। इसी वजह से चुनाव आयोग समय-समय पर सूची को सुधारने की विशेष प्रक्रिया चलाता है। ताजा घटनाक्रम में 17 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में सूची अद्यतन की तैयारी इसी दिशा का कदम है। आम तौर पर इस प्रक्रिया में तीन बातें अहम होती हैं। पहली, घर-घर जाकर सत्यापन, जिससे यह पता चलता है कि मतदाता वास्तव में उस पते पर रहता है या नहीं। दूसरी, 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के नाम जोड़ना, ताकि पहली बार मतदान करने वाले वंचित न रहें। तीसरी, दोहरी प्रविष्टियों और त्रुटियों को दूर करना, ताकि सूची साफ और विश्वसनीय बने। नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम, फोटो, पता और आयु सूची में जरूर जांचें। यदि कोई गलती मिले तो निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से सुधार कराया जा सकता है। जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है, और सही सूची उसी की पहली शर्त है।
