विशेष रिपोर्ट पैरा तीरंदाज़ शीतल देवी की प्रेरक स्वर्ण उड़ान

एशियाई पैरा खेलों में शीतल देवी का प्रदर्शन केवल पदकों की कहानी नहीं है, यह संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। बिना बाजुओं के जन्मी शीतल ने पैरों और कंधे की अनूठी तकनीक से विश्व रिकॉर्ड और दो स्वर्ण अपने नाम किए।
शीतल की यात्रा जम्मू-कश्मीर के एक छोटे गांव से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी सफलता हज़ारों दिव्यांग युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करेगी। भारत में पैरा खेलों के बुनियादी ढांचे को लेकर भी उनकी उपलब्धि नई बहस छेड़ रही है।
गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम पर संबंधित विभागों और संगठनों की नज़र बनी हुई है। आगे की कार्रवाई और आधिकारिक जानकारी का इंतज़ार किया जा रहा है। पब्लिक वॉयस न्यूज़ नेटवर्क इस खबर के हर अपडेट पर नज़र रखेगा और नई जानकारी मिलते ही पाठकों तक पहुंचाएगा।
