विशेष रिपोर्ट दिल्ली की हवा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट

दिल्ली की हवा एक बार फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है और इसके साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य का पुराना संकट गहरा गया है। ग्रैप-1 लागू होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है।
स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण के दिनों में सांस और हृदय रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आपात कदमों से काम नहीं चलेगा, परिवहन, निर्माण और पराली जैसे स्रोतों पर साल भर की नीति ही असली समाधान है। राजधानी के निवासियों के लिए स्वच्छ हवा अब सबसे बड़ी मांग बन गई है।
फिलहाल स्थिति पर प्रशासन और संबंधित संस्थान लगातार नज़र बनाए हुए हैं। जनता से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। पब्लिक वॉयस न्यूज़ नेटवर्क इस मुद्दे की निरंतर कवरेज जारी रखेगा।
