यूपीआई के दस साल, भारत बना डिजिटल भुगतान का विश्व नेता

भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई ने अपने दस वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस पड़ाव के साथ भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है। एक दशक पहले शुरू हुई यह व्यवस्था आज गांव की छोटी दुकान से लेकर बड़े शहरों के शॉपिंग मॉल तक हर जगह भुगतान का सबसे आसान जरिया बन चुकी है। मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड के जरिये सेकंडों में पैसा भेजना अब आम आदमी की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा है।
यूपीआई की सफलता की सबसे बड़ी वजह इसकी सरलता और बिना किसी शुल्क के तत्काल लेनदेन की सुविधा रही है। इससे छोटे व्यापारियों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ने का मौका मिला और नकदी पर निर्भरता कम हुई। फल-सब्जी विक्रेता, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर आज यूपीआई से भुगतान स्वीकार करते हैं, जिससे उनका कारोबार पारदर्शी और सुरक्षित हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई ने वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। बैंक खाते से सीधे जुड़ी इस व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका घटाई और ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल भुगतान की पहुंच बनाई। आने वाले वर्षों में यूपीआई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार से भारतीय पर्यटकों और व्यापारियों को विदेशों में भी इसी सहूलियत से भुगतान की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File%3ADZ3_0627_A_night_market_stall_in_Sattahip_Thailand_-_vendors_weigh_durians_as_a_young_buyer_uses_his_phone_to_scan_or_pay_while_another_customer_captures_the_scene_on_their_smartphone.jpg (CC BY-SA 4.0)
