पोलियो उन्मूलन की अंतिम लड़ाई, दो देशों में बचा वायरस

24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है टुगेदर, वी एंड पोलियो, यानी मिलकर हम पोलियो को खत्म करेंगे। यह दिवस दुनिया भर में पोलियो की रोकथाम और टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। पोलियो मुख्य रूप से पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। यह तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचाकर स्थायी लकवा का कारण बन सकता है। गंभीर मामलों में साँस लेने वाली मांसपेशियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं। पोलियो का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है। भारत को 2014 में पोलियो-मुक्त देश प्रमाणित किया गया था। यह उपलब्धि दशकों तक चले टीकाकरण अभियान और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा थी। आज दुनिया में अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही ऐसे दो देश हैं जहाँ जंगली पोलियो वायरस अब भी मौजूद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और रोटरी इंटरनेशनल जैसे संगठन हर बच्चे तक टीका पहुँचाने के लिए काम कर रहे हैं। टीकों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना भी इस अभियान की बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दुनिया के हर बच्चे को टीका नहीं लगेगा, तब तक कोई भी देश पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:A%20child%20is%20being%20administered%20the%20Polio%20Vaccination%20at%20a%20centre%20in%20New%20Delhi%2C.%20The%20Government%20has%20intensified%20Polio%20Immunization%20Programme%20across%20the%20country%20as%20some%20cases%20of%20polio%20identified%20at%20places.jpg (GODL-India)
