इंटरनेट-मेट्रो बंदी पर केंद्र ने अदालत में खेद जताया

नई दिल्ली। राजधानी में प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट और मेट्रो सेवाएं बंद किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में खेद जताया है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हालात को संभालने के लिए यह कदम उठाया गया था, हालांकि इससे आम लोगों को हुई असुविधा पर अफसोस है। इस प्रदर्शन में करीब सात हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिस पर अदालत ने सख्त सवाल पूछे थे। मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सेवाएं बंद करने का फैसला लेते समय नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान क्यों नहीं रखा गया। अदालत संस्थाओं और प्रशासन से संतुलित रवैये की उम्मीद करती है, ताकि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ लोगों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उसकी पहली जिम्मेदारी है। राजधानी में हुए इस घटनाक्रम के बाद भविष्य में ऐसे फैसलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपात कदमों में भी अनुपात और पारदर्शिता जरूरी है। अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर आगे की नीतियों पर पड़ सकता है।
