LIVE राष्ट्रीय संस्करण Sunday, 25 October 2026 ई-पेपर | publicvoicenewsnetwork.in

जनता की आवाज़ • सत्य की सेवा • बिना डर, बिना समझौते

ताज़ा खबर
सूरत में निर्मिति आर्ट एग्जिबिशन का अंतिम दिन, 38 कलाकार शामिल212 साल में पहली बार दिखे दुर्गा के स्वर्ण आभूषणनेहरू पार्क में आज शास्त्रीय संगीत संध्या, सितार वादन से शुरुआतलेखक गांव में आज से अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव, 60 देशों के प्रतिनिधिजेलर 2 ने शनिवार को कमाए 24 करोड़ रुपयेम्यूजिक प्रोजेक्ट में हिमेश का माइक बंद, फिर भी गाते रहेरामायण के गीत मंगल रंग में रहमान अरिजीत की जुगलबंदीधुरंधर का फ्रीडिश प्रीमियर आज शाम सात बजे, हर घर पहुंचेगासूरत में निर्मिति आर्ट एग्जिबिशन का अंतिम दिन, 38 कलाकार शामिल212 साल में पहली बार दिखे दुर्गा के स्वर्ण आभूषणनेहरू पार्क में आज शास्त्रीय संगीत संध्या, सितार वादन से शुरुआतलेखक गांव में आज से अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव, 60 देशों के प्रतिनिधिजेलर 2 ने शनिवार को कमाए 24 करोड़ रुपयेम्यूजिक प्रोजेक्ट में हिमेश का माइक बंद, फिर भी गाते रहेरामायण के गीत मंगल रंग में रहमान अरिजीत की जुगलबंदीधुरंधर का फ्रीडिश प्रीमियर आज शाम सात बजे, हर घर पहुंचेगा
राष्ट्रीय

मुसलमान इस देश के किराएदार नहीं, बल्कि मूल नागरिक हैं” — RSS नेता इन्द्रेश कुमार का बयान चर्चा में

दिनांक: Tuesday, 30 June 2026 | समय: 09:29 AM | लेखक: | श्रेणी: राष्ट्रीय

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार का एक बयान इन दिनों व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “भारत के मुसलमान इस देश के किराएदार नहीं हैं, बल्कि वे इस देश के मूल नागरिक थे और हैं।” उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, साझा सांस्कृतिक विरासत और सभी समुदायों की भागीदारी में निहित है। उनके अनुसार, देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान, विश्वास और अवसर मिलना चाहिए। इन्द्रेश कुमार ने यह भी कहा कि भारत की पहचान किसी एक समुदाय से नहीं, बल्कि यहां रहने वाले सभी नागरिकों की साझी विरासत और सहभागिता से बनी है। उन्होंने सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को देश की प्रगति के लिए आवश्यक बताया। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रीय पहचान, सामाजिक समरसता और भारत की बहुलतावादी संस्कृति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इस बयान का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाला बताया, जबकि कुछ ने इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा है। फिलहाल, इन्द्रेश कुमार का यह वक्तव्य सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

संबंधित ख़बरें

राष्ट्रीय

सूरत में निर्मिति आर्ट एग्जिबिशन का अंतिम दिन, 38 कलाकार शामिल

25 October 2026

सूरत में आयोजित निर्मिति-सूरत आर्ट एग्जिबिशन का रविवार, 25 अक्टूबर को अंतिम दिन है। डुमस स्थित नोमैड्स कैफे में आयोजित…

राष्ट्रीय

नेहरू पार्क में आज शास्त्रीय संगीत संध्या, सितार वादन से शुरुआत

25 October 2026

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेहरू पार्क में रविवार, 25 अक्टूबर को शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा। एनडीएमसी…