वाल्मीकि विरासत संवारेगी यूपी सरकार, चित्रकूट से अयोध्या तक विकास

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संजोने और उनके जीवन-दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के तहत अयोध्या, चित्रकूट और इटावा में महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों को संवारने का काम किया जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार प्रदेश सरकार रामायण परंपरा से जुड़े स्थलों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने चित्रकूट को इसका प्रमुख उदाहरण बताया। उनका कहना है कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मबोध, ज्ञान-साधना और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देता है।
चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है और आश्रम के विकास पर बड़ी राशि खर्च की गई है। इसके निकट पर्यटन सुविधा केंद्र का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है। वाल्मीकि घाट, परिक्रमा पथ और आरती स्थल के विकास की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। इन परियोजनाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
तस्वीर: https://thumb.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/f/fc/Balinese_dance_Legong_in_Ubud%2C_Ramayana_performance%2C_20220823_1905_0460.jpg/1280px-Balinese_dance_Legong_in_Ubud%2C_Ramayana_performance%2C_20220823_1905_0460.jpg?utm_source=commons.wikimedia.org&utm_campaign=imageinfo&utm_content=thumbnail (CC BY-SA 4.0)
