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धर्म एवं संस्कृति

शाहपुर में शरद पूर्णिमा की खीर चांदनी परंपरा श्रद्धालुओं में उत्साह

दिनांक: Saturday, 24 October 2026 | समय: 03:37 PM | लेखक: | श्रेणी: धर्म एवं संस्कृति

बिहार के शाहपुर क्षेत्र में शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की पुरानी परंपरा को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृतमयी किरणें बिखेरता है। इसी विश्वास के साथ लोग दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं। देर रात तक चांदनी में रखने के बाद खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को लेकर परिवारों में विशेष तैयारी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि कई घरों में शाम से ही पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। शाहपुर में इस परंपरा से जुड़ा एक विशेष विधान भी प्रचलित है, जिसमें पीपल की छाल मिलाकर खीर को अमृत तुल्य माना जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और यह रात जागरण तथा माता लक्ष्मी की आराधना के लिए जानी जाती है। आयोजकों और जानकारों का कहना है कि परंपरा निभाते समय स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। खीर को ढककर रखना चाहिए और खराब होने की आशंका हो तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।

तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Full_Moon_Night_Sight.jpg (CC BY-SA 4.0)

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