उज्जैन में मंदिर गिरवी रखकर 645 करोड़ कर्ज प्रस्ताव पर हंगामा

उज्जैन में मंदिरों को गिरवी रखकर करीब छह सौ पैंतालीस करोड़ रुपये का कर्ज लेने के प्रस्ताव पर विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रस्ताव की जानकारी सामने आते ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों को कर्ज के लिए गिरवी रखना आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला है, इसलिए इस पर खुली चर्चा और पारदर्शिता जरूरी है।
विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रस्ताव के पीछे की जरूरत, कर्ज की शर्तें और चुकाने की योजना सार्वजनिक की जाए। उनका तर्क है कि मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान भी हैं। ऐसे में किसी भी वित्तीय फैसले में जनभावनाओं का सम्मान होना चाहिए। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि विकास कार्यों के लिए धन जुटाने के दूसरे विकल्प तलाशे जाने चाहिए।
प्रशासन की ओर से अभी इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण का इंतजार है। स्थानीय स्तर पर यह बहस भी तेज हो गई है कि धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के प्रबंधन में कितनी पारदर्शिता होनी चाहिए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और चर्चा होने की संभावना है, और लोग इस पर प्रशासन के रुख पर नजर बनाए हुए हैं।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Mahakaleshwar_Temple,_Ujjain.jpg (CC BY-SA 4.0)
