नाविक प्रणाली मज़बूत करेगा इसरो का नया उपग्रह परीक्षण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपनी स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली नाविक को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए दूसरी पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रहों की एनवीएस श्रृंखला का परीक्षण किया जा रहा है। इस श्रृंखला में नागरिक एल1 बैंड और परमाणु घड़ियों की सटीकता बढ़ाने पर खास ध्यान दिया गया है। नाविक प्रणाली भारत की अपनी उपग्रह आधारित नेविगेशन सेवा है, जो स्थान, दिशा और समय की सटीक जानकारी देती है। यह प्रणाली परिवहन, आपदा प्रबंधन, कृषि, सर्वेक्षण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी है। विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भरता बढ़ाना इस कार्यक्रम का बड़ा उद्देश्य है। एनवीएस उपग्रहों के जरिए सिग्नल की गुणवत्ता और कवरेज में सुधार होने की उम्मीद है। इससे आम नागरिकों के मोबाइल और वाहनों में भी बेहतर नेविगेशन अनुभव मिलेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि नेविगेशन तकनीक आज डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुनियाद बन चुकी है। सटीक स्थान की जानकारी के बिना परिवहन, लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन सेवाएँ प्रभावी नहीं हो सकतीं। भारत का यह प्रयास अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Committee%20on%20Earth%20Observation%20Satellites%20%28CEOS%29%20-%20Fleet%20-%202026%20%28SVS5621%29.jpg (Public domain)
