Latest News
‘यह नए नेतृत्व की तलाश करने का समय है’: ट्रम्प ने ‘बीमार’ खमेनेई के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया – क्या राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ नए सिरे से धमकियां दे रहे हैं?ट्रम्पियाना: पेटुलेंट पुरस्कार सेनानी के लिए कोई विराम नहीं‘पहले कभी नहीं देखा’: सऊदी गुफाओं में चीता की ममियाँ मिलीं – प्राकृतिक रूप से ममीकृत बड़ी बिल्लियों के लिए पहली बारएक अलग रोहित शर्मा: क्यों भारत के सलामी बल्लेबाज अब अधिक सावधानी से बल्लेबाजी कर रहे हैं | क्रिकेट समाचार‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिन 43: रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना की फिल्म ने दुनिया भर में 1275 करोड़ रुपये कमाए |‘बंगाल टीएमसी से तंग आ चुका है’: महा जीत के बाद पीएम मोदी ने ममता पर निशाना साधा; मालदा रैली कल इंडिया न्यूजबजट 2026: लंबे समय से लंबित और लंबे समय तक चलने वाले कर मुकदमे से निपटने की तत्काल आवश्यकतावेनेजुएला से ईरान तक: कैसे अमेरिका की मिसाइल हमले से ठोस रॉकेट मोटर आपूर्ति संकट पैदा हो रहा है – समझाया गया‘मानो यह जंतर-मंतर हो!’ ED के आरोप से SC ‘परेशान’; एजेंसी का कहना है कि टीएमसी ने इंडिया न्यूज पर I-PAC की छापेमारी से पहले लोगों को HC आने के लिए कहा था‘खराब योजना’: निखिल कामथ ने बीएमसी चुनावों के दौरान शेयर बाजार बंद होने पर सवाल उठाए; झंडे ‘सराहना की गंभीर कमी’

“सहमति से सेक्स की कानूनी उम्र पर बहस तेज़: इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में रखे तर्क”

Follow

Published on: 01-08-2025

नई दिल्ली, जुलाई 2025
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह द्वारा सहमति से यौन संबंध की कानूनी उम्र (वर्तमान में 18 वर्ष) को लेकर दिए गए तर्कों ने देशभर में नई बहस को जन्म दिया है। जयसिंह ने कोर्ट से अनुरोध किया कि 16 से 18 वर्ष के किशोरों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में न रखा जाए।

अपने लिखित तर्क में जयसिंह ने कहा,

“उम्र पर आधारित कानूनों का उद्देश्य बच्चों को शोषण से बचाना होना चाहिए, न कि सहमति पर आधारित और उम्र के लिहाज से उचित संबंधों को अपराध मान लेना।”

उनका कहना है कि किशोरों के बीच सहमति से बने संबंध न तो शोषण की श्रेणी में आते हैं और न ही अत्याचार के अंतर्गत। ऐसे मामलों को पॉक्सो (POCSO) जैसे कठोर क़ानूनों के अंतर्गत लाना, किशोरों के जीवन को अनावश्यक रूप से आपराधिक बना देता है।

हालाँकि, केंद्र सरकार ने इस तर्क का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि यदि ऐसे अपवाद की अनुमति दी जाती है, तो नाबालिग बच्चों का शोषण और अत्याचार और अधिक बढ़ सकता है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि 18 साल से कम उम्र को नाबालिग मानना भारतीय कानून की मूल भावना है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।

यह मामला न केवल क़ानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश के साथ ऐसे विषयों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है, वहीं बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है, यह आने वाले समय में देश के किशोर न्याय तंत्र और यौन शिक्षा नीति पर गहरा प्रभाव डालेगा।

#इंदिरा_जयसिंह #सहमति_से_सेक्स #POCSO #SupremeCourt #किशोर_न्याय #IndianLaw #SexualConsent #MinorRights #LegalAgeDebate #ChildProtection

Publice Voice News Network – Premium Description (Hindi)
Publice Voice News Network एक सशक्त, विश्वसनीय और स्वतंत्र मीडिया प्लेटफ़ॉर्म है, जो जनता की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने के लिए समर्पित है। हम मानते हैं कि सच्ची पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता नहीं, सत्य की सेवा है — और इसी सिद्धांत पर हमारा पूरा नेटवर्क कार्य करता है।
Publice Voice News Network उन मुद्दों को उजागर करता है जो समाज, लोकतंत्र और मानवाधिकारों से जुड़े हैं, जिन्हें आमतौर पर मुख्यधारा मीडिया नजरअंदाज कर देता है। हम हर खबर को तथ्यों, प्रमाणों और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करते हैं— बिना दबाव, बिना डर और बिना समझौते के।

राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरता हुआ विश्वसनीय न्यूज़ नेटवर्क