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डेंगू में अधिक सावधानी बरतने की है जरूरत -डॉ वी के वर्मा!

Published on: 20-10-2023

*शमसुलहक खान की रिपोर्ट*

*डेंगू में अधिक सावधानी बरतने की है जरूरत -डॉ वी के वर्मा!*

बस्ती- उत्तर प्रदेश में इन दिनो डेंगू अपना पॉव पसार रहा है इस वजह से अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है। घबराने की जरूरत नहीं है,  लापरवाही खतरनाक हो सकती है। बुखार अधिक दिन रहने पर चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है। इसके अलावा, घर में या आसपास कहीं भी साफ पानी न जमा होने दें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहने और दिक्कत महसूस होने पर चिकित्सक की सलाह पर ही दवाई का सेवन करे।
मौसम में रोज हो रहे बदलाव का असर लोगों की सेहत पर अधिक पड़ रहा है। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज एवं नर्सिंग होम पर में मौसमी बीमारियों से पीड़ितों की भीड़ हो रही है। जिला अस्पताल के आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा से डेंगू बुखार के लक्षण, बचाव और घरेलू उपचार के बारे में बात की गयी। उन्होने कहा बुखार के 10 मरीजों में 1 डेंगू के मिल रहे हैं। डेंगू बुखार से बचने के लिये खुद सावधान होना पड़ेगा। बेहतर होगा कि हम अपने आसपास डेंगू मच्छरों को न पनपने दें। तेज बुखार व सिरदर्द, हाथों-पैरों में दर्द, भूख न लगना, जी मचलाना, उल्टी और दस्त, आंखों में दर्द, कमजोरी और थकावट, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर लाल धब्बे पड़ना, नाक से खून आना आदि डेंगू बुखार के लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों के दिखते ही किसी सक्षम चिकित्सक के संपर्क में आना चाहिये। डेंगू एक संचारी रोग है जो मच्छरों द्वारा एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसके लिये कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है ऐसे में बचाव का सिर्फ एक तरीका है खुद को मच्छरों से बचाकर रखना। आप मॉस्किटो रेपलेंट्स, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। अपने घर के दरवाजे और खिड़कियों को शाम होने से पहले बदं कर दें। शरीर को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़े पहनें। अपने आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर का पानी बदलते रहें। गमलों, टूटे फूटे बर्तनों, पुराने टायरों, जानवरों के भोजन के पात्र, प्लास्टिक के डिब्बों आदि में पानी न इकट्ठा होने दें। पानी को ढंक कर रखें। ऐसी जगहों पर ही मच्छर अंडे देते हैं। यदि कोई खुला जल स्रोत है, जिसे आप हटा नहीं कर सकते हैं, तो उसे या तो ढंक दें या फिर उपयुक्त कीटनाशक अप्लाई करें।
उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में इयूपिटोरियमपर्फ, आरसेनिक एलबम, चाइना, नाइट्रम्योर, एकोनाइट, बेलाडोना, रसटास्क, डलकामारा, नक्सबोम दवायें लक्षण के अनुसार उचित पॉवर में सक्षम चिकित्सक की देखरेख में ली जा सकती हैं। होम्योपैथी सरल, सहज और आसानी से उपलब्ध होने वाली सस्ती चिकित्सा पद्धति है जो समय रहते शुरू की जाये तो बड़ी क्षति को रोकने में सक्षम है।
डा. वी.के. वर्मा के अनुसार डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है इसलिए अपनी डाइट में आयरन से भरपूर फलों व सब्जियों को शामिल करना चाहिये। पपीता खाएं या आप इसकी ताजी पत्तियों के जूस निकाल कर पी सकते हैं। इससे इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है और खून में प्लेटलेट काउंट तेजी से बढ़ते हैं। इस बुखार में नारियल पानी का सेवन भी काफी फायदेमंद हो सकता है। साथ ही बकरी का दूध काफी लाभदायक है। इसमें मौजूद पोषक तत्व व मिनरल्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर रिकवरी में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू उपचार में तुलसी, काली मिर्च को 1 कप पानी में डालकर अच्छी तरह उबालें। फिर इसे ठंडा करके दिन में 4 से 5 बार पिएं। इससे भी इम्यून सिस्टम मजबूत होगा और डेंगू से छुटकारा मिलेगा। गिलोय का जूस खून में व्हाइट ब्लड सेल्स बढ़ाने में काफी मददगार है। डेंगू के मरीज को नियमित रूप से गिलोय का रस पीना चाहिये, इससे उसकी तबीयत में जल्दी सुधार होगा। 1 गिलास गाजर के जूस में 3-4 चम्मच चुकंदर का रस मिलाकर मरीज को दें। इससे प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। डेंगू के मरीज को लाल फल और सब्जियां जैसे- टमाटर,  तरबूज, चेरी आदि का सेवन करना चाहिये। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भरपूर होती है, जिससे शरीर में ब्लड सेल्स की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है।

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