आशा कार्यकर्ताओं ने छब्बीस हजार मानदेय और कर्मचारी दर्जा मांगा

गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। उनकी प्रमुख मांग छब्बीस हजार रुपये मासिक मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे टीकाकरण, प्रसव देखभाल, सर्वेक्षण और जागरूकता अभियानों में दिन-रात काम करती हैं, फिर भी उन्हें इतना कम मानदेय मिलता है कि परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं के श्रम को मान्यता देना महिला सशक्तिकरण की दिशा में जरूरी कदम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जमीनी स्वास्थ्य ढांचा इन्हीं कार्यकर्ताओं के भरोसे चलता है, इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। फिलहाल कार्यकर्ता सरकार के रुख का इंतजार कर रही हैं।
