मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों की बढ़ी मांग

दीपावली नज़दीक आते ही मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों के काम में तेज़ी आ गई है। चाक पर दिन-रात दीये तैयार हो रहे हैं और बाज़ारों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इस बार दीयों की मांग पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बताई जा रही है, जिससे कारीगर परिवारों में उत्साह है।कुम्हारों का कहना है कि लोग अब बिजली की झालरों के साथ-साथ पारंपरिक मिट्टी के दीयों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता से भी हाथ से बने दीयों की बिक्री बढ़ी है। कई स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी दीये और सजावटी सामान तैयार कर रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का साधन मिला है।कारीगरों ने बताया कि कच्चे माल की व्यवस्था पहले से कर ली गई थी, ताकि समय पर आपूर्ति हो सके। बाज़ारों में साधारण दीयों के अलावा रंग-बिरंगे और डिज़ाइनर दीयों की भी मांग है। त्योहार से इन परिवारों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से भी स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की गई है।
