नेहा बोरा ने रिहाई के बाद सुनाई अपनी आपबीती

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं सामाजिक कार्यकर्ता नेहा बोरा रिहा होने के बाद सामने आईं और उन्होंने हिरासत के दौरान का अपना अनुभव साझा किया। नेहा ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों के साथ ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके मुताबिक, आवाज उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे दबाया नहीं जाना चाहिए। मानवाधिकार संगठनों ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस जैसे संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा हो और भविष्य में ऐसी कार्रवाई से बचा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से जुड़ी चिंताओं को सुनना और उनका समाधान करना ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। नेहा बोरा की रिहाई के बाद समर्थकों ने राहत जताई है, हालांकि आंदोलन से जुड़े संगठन एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारियों में जुटे हैं।
