खेत में सौर ऊर्जा और फसल, दोनों आमदनी का नया रास्ता

खेतों में सौर ऊर्जा और खेती को एक साथ जोड़ने वाली एग्रीवोल्टिक तकनीक भारत के किसानों के लिए आमदनी का नया रास्ता खोल रही है। इस तकनीक में खेत के ऊपर सौर पैनल लगाए जाते हैं, जिनके नीचे फल, सब्जियां, मसाले और औषधीय पौधे उगाए जा सकते हैं। इससे किसान को फसल के साथ-साथ बिजली बेचने से भी कमाई होती है।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई), गुरुग्राम और आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली के सहयोग से स्थापित उत्कृष्टता केंद्र में इस तकनीक पर काम हो रहा है। आईएआरआई में 100 किलोवाट का पायलट संयंत्र लगाया गया है। अनुमान है कि कुछ मामलों में किसानों की वार्षिक आमदनी प्रति एकड़ 60 हजार रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये से अधिक हो सकती है।
पीएम-कुसुम योजना के तहत केंद्र सरकार ने करीब 34,422 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अब तक केवल 37.54 मेगावाट एग्रीवोल्टिक क्षमता ही स्थापित हुई है, इसलिए यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। फसल का चुनाव, स्थानीय जलवायु और पानी की दक्षता जैसे पहलुओं पर स्थान-विशेष अध्ययन की जरूरत बताई जा रही है।
तस्वीर: https://commons.wikimedia.org/wiki/File%3AAn_array_of_solar_panels_in_a_field_-_geograph.org.uk_-_5645678.jpg (CC BY-SA 2.0)
