LIVE राष्ट्रीय संस्करण Sunday, 25 October 2026 ई-पेपर | publicvoicenewsnetwork.in

जनता की आवाज़ • सत्य की सेवा • बिना डर, बिना समझौते

ताज़ा खबर
सूरत में निर्मिति आर्ट एग्जिबिशन का अंतिम दिन, 38 कलाकार शामिल212 साल में पहली बार दिखे दुर्गा के स्वर्ण आभूषणनेहरू पार्क में आज शास्त्रीय संगीत संध्या, सितार वादन से शुरुआतलेखक गांव में आज से अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव, 60 देशों के प्रतिनिधिजेलर 2 ने शनिवार को कमाए 24 करोड़ रुपयेम्यूजिक प्रोजेक्ट में हिमेश का माइक बंद, फिर भी गाते रहेरामायण के गीत मंगल रंग में रहमान अरिजीत की जुगलबंदीधुरंधर का फ्रीडिश प्रीमियर आज शाम सात बजे, हर घर पहुंचेगासूरत में निर्मिति आर्ट एग्जिबिशन का अंतिम दिन, 38 कलाकार शामिल212 साल में पहली बार दिखे दुर्गा के स्वर्ण आभूषणनेहरू पार्क में आज शास्त्रीय संगीत संध्या, सितार वादन से शुरुआतलेखक गांव में आज से अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव, 60 देशों के प्रतिनिधिजेलर 2 ने शनिवार को कमाए 24 करोड़ रुपयेम्यूजिक प्रोजेक्ट में हिमेश का माइक बंद, फिर भी गाते रहेरामायण के गीत मंगल रंग में रहमान अरिजीत की जुगलबंदीधुरंधर का फ्रीडिश प्रीमियर आज शाम सात बजे, हर घर पहुंचेगा
ब्रेकिंग न्यूज़

इंटरनेट-मेट्रो बंदी पर केंद्र ने अदालत में खेद जताया

दिनांक: Thursday, 15 October 2026 | समय: 09:08 AM | लेखक: | श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

नई दिल्ली। राजधानी में प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट और मेट्रो सेवाएं बंद किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में खेद जताया है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हालात को संभालने के लिए यह कदम उठाया गया था, हालांकि इससे आम लोगों को हुई असुविधा पर अफसोस है। इस प्रदर्शन में करीब सात हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिस पर अदालत ने सख्त सवाल पूछे थे। मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सेवाएं बंद करने का फैसला लेते समय नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान क्यों नहीं रखा गया। अदालत संस्थाओं और प्रशासन से संतुलित रवैये की उम्मीद करती है, ताकि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ लोगों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उसकी पहली जिम्मेदारी है। राजधानी में हुए इस घटनाक्रम के बाद भविष्य में ऐसे फैसलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपात कदमों में भी अनुपात और पारदर्शिता जरूरी है। अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर आगे की नीतियों पर पड़ सकता है।

संबंधित ख़बरें